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harivansh rai bachchan hindi kavita main kal raat nahin roya tha

इरशाद

हरिवंशराय बच्चन की हिंदी कविता 'मैं कल रात नहीं रोया था'

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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मैं कल रात नहीं रोया था

दुख सब जीवन के विस्मृत कर,
तेरे वक्षस्थल पर सिर धर,
तेरी गोदी में चिड़िया के बच्चे-सा छिपकर सोया था
मैं कल रात नहीं रोया था

प्यार-भरे उपवन में घूमा,
फल खाए, फूलों को चूमा,
कल दुर्दिन का भार न अपने पंखो पर मैंने ढोया था
मैं कल रात नहीं रोया था

आंसू के दाने बरसाकर
किन आंखो ने तेरे उर पर
ऐसे सपनों के मधुवन का मधुमय बीज, बता, बोया था?
मैं कल रात नहीं रोया था
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