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इरशाद

जनम-जनम की पहचानी वह तान कहां से आई, किसने बांसुरी बजाई - जानकीवल्लभ शास्त्री

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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जनम-जनम की पहचानी वह तान कहां से आई 
किसने बांसुरी बजाई

अंग-अंग फूले कदंब सांस झकोरे झूले
सूखी आंखों में यमुना की लोल लहर लहराई !
किसने बांसुरी बजाई

जटिल कर्म-पथ पर थर-थर कांप लगे रुकने पग
कूक सुना सोए-सोए हिय मे हूक जगाई !
किसने बांसुरी बजाई

मसक-मसक रहता मर्मस्थल मरमर करते प्राण
कैसे इतनी कठिन रागिनी कोमल सुर में गाई !
किसने बांसुरी बजाई

उतर गगन से एक बार फिर पी कर विष का प्याला
निर्मोही मोहन से रूठी मीरा मृदु मुस्काई !
किसने बांसुरी बजाई
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