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जिगर मुरादाबादी

इरशाद

अब तो ये भी नहीं रहा एहसास: जिगर मुरादाबादी

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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अब तो ये भी नहीं रहा एहसास 
दर्द होता है या नहीं होता 

इश्क़ जब तक न कर चुके रुस्वा 
आदमी काम का नहीं होता 

टूट पड़ता है दफ़अ'तन जो इश्क़ 
बेश-तर देर-पा नहीं होता 

वो भी होता है एक वक़्त कि जब 
मा-सिवा मा-सिवा नहीं होता  आगे पढ़ें

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