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केदारनाथ सिंह

इरशाद

वे क्यों भागे जाते हैं जिनके घर हैं: केदारनाथ सिंह

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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वे क्यों चुप हैं जिनको आती है भाषा
वह क्या है जो दिखता है धुआँ-धुआँ-सा

वह क्या है हरा-हरा-सा जिसके आगे
हैं उलझ गए जीने के सारे धागे

यह शहर कि जिसमें रहती हैं इच्छाएँ
कुत्ते-भुनगे-आदमी-गिलहरी-गाएँ आगे पढ़ें

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