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कुंवर नारायण

इरशाद

किसी दिन मर भी सकता है वह उनकी खुशी के लिए जो मरे-मरे से रहते हैं

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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बीमार नहीं है वह
कभी-कभी बीमार-सा पड़ जाता है
उनकी ख़ुशी के लिए
जो सचमुच बीमार रहते हैं। आगे पढ़ें

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