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इरशाद

किन मौसमों के यारों हम ख़्वाब देखते हैं: 'महताब' हैदर नक़वी

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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किन मौसमों के यारो हम ख़्वाब देखते हैं 
जंगल पहाड़ दरिया तालाब देखते हैं 

इस आसमाँ से आगे इक और आसमाँ पर 
महताब से जुदा इक महताब देखते हैं  आगे पढ़ें

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