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अभी तो और भी दिन बारिशों के आने थे: मोहम्मद अल्वी

इरशाद

अभी तो और भी दिन बारिशों के आने थे: मोहम्मद अल्वी

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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अभी तो और भी दिन बारिशों के आने थे 
करिश्मे सारे उसे आज ही दिखाने थे 

हिक़ारतें ही मिलीं हम को ज़ंग-आलूदा 
दिलों में यूँ तो कई क़िस्म के ख़ज़ाने थे 

ये दश्त तेल का प्यासा न था ख़ुदा-वंदा 
यहाँ तो चार छे दरिया हमें बहाने थे  आगे पढ़ें

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