आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Irshaad ›   Mohsin Naqvi nazm usey kehna bichhadne se mohabbat toh nahin marti
Mohsin Naqvi nazm usey kehna bichhadne se mohabbat toh nahin marti

इरशाद

मोहसिन नक़वी की नज़्म - बिछड़ने से मुहब्बत तो नहीं मरती

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

1070 Views

उसे कहना बिछड़ने से मुहब्बत तो नहीं मरती
बिछड़ जाना मुहब्बत की सदाकत की अलामत है

मुहब्बत एक फितरत है, हां फ़ितरत कब बदलती है
सो, जब हम दूर हो जाएं, नए रिश्तों में खो जाएं

तो यह मत सोच लेना तुम, के मुहब्बत मर गई होगी
नहीं ऐसे नहीं होगा 



मेरे बारे में गर तुम्हारी आंखें भर आयें
छलक कर एक भी आंसू पलक पे जो उतर आये

तो बस इतना समझ लेना,
जो मेरे नाम से इतनी तेरे दिल को अक़ीदत है

तेरे दिल में बिछड़ कर भी अभी मेरी मुहब्बत है
मुहब्बत तो बिछड़ कर भी सदा आबाद रहती है

मुहब्बत हो किसी से तो हमेशा याद रहती है
मुहब्बत वक़्त के बे-रहम तूफ़ान से नहीं डरती

सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!