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आलोक श्रीवास्तव की नज़्म: दिल से निकली हूँ, रोशन दुआ की तरह

इरशाद

आलोक श्रीवास्तव की नज़्म: दिल से निकली हूँ, रोशन दुआ की तरह

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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जब निर्भया का निर्मम केस हुआ था तब मशहूर शायर आलोक श्रीवास्तव ने यह कविता लिखी थी, जिसे मशहूर शाष्त्रीय गायिका शुभा मुद्गल ने अपनी आवाज़ दी थी और संगीत दिया था अंनिंदो बोस ने। आज जब निर्भया केस पर कोर्ट का फ़ैसला आया है तब फिर से यह कविता प्रांसंगिक हो गई है। 

दिल से निकली हूँ, रोशन दुआ की तरह,
खुल के बहने दो मुझको, हवा की तरह. 
 
पँख फैलाऊँगी मैं ये विश्वास है
मेरी धरती है ये मेरा आकाश है 
इसपे छाने दो मुझको, घटा की तरह
खुल के बहने दो मुझको, हवा की तरह
 
बंदिशों से मुझे सख़्त इनकार है
ये मेरा देश है, मेरा संसार है
क्यों न इठलाऊँ चंचल हवा की तरह
खुल के बहने दो मुझको, हवा की तरह

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