आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Irshaad ›   Tahzeeb hafi ghazal chehra dekhein tere honth aur palkein dekhein
Tahzeeb hafi ghazal chehra dekhein tere honth aur palkein dekhein

इरशाद

साल होने को आया है वो कब लौटेगा - तहज़ीब हाफ़ी

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

1169 Views

चेहरा देखें तेरे होंट और पलकें देखें
दिल पे आंखें रक्खें तेरी सांसें देखें

सुर्ख़ लबों से सब्ज़ दुआएं फूटी हैं
पीले फूलों तुम को नीली आंखें देखें

साल होने को आया है वो कब लौटेगा
आओ खेत की सैर को निकलें कूजें देखें

थोड़ी देर में जंगल हम को आक़ करेगा
बरगद देखें या बरगद की शाख़ें देखें

मेरे मालिक आप तो सब कुछ कर सकते हैं
साथ चलें हम और दुनिया की आंखें देखें

हम तेरे होंटों की लर्ज़िश कब भूले हैं
पानी में पत्थर फेंकें और लहरें देखें

सर्वाधिक पढ़े गए
Top

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Your Story has been saved!