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waseem barelvi ghazal apne har har lafz ka khud aina ho jaunga

इरशाद

अपने हर हर लफ़्ज़ का ख़ुद आईना हो जाऊंगा - वसीम बरेलवी

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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अपने हर हर लफ़्ज़ का ख़ुद आईना हो जाऊंगा
उस को छोटा कह के मैं कैसे बड़ा हो जाऊंगा

तुम गिराने में लगे थे तुम ने सोचा ही नहीं
मैं गिरा तो मसअला बन कर खड़ा हो जाऊंगा

मुझ को चलने दो अकेला है अभी मेरा सफ़र
रास्ता रोका गया तो क़ाफ़िला हो जाऊंगा

सारी दुनिया की नज़र में है मिरा अहद-ए-वफ़ा
इक तिरे कहने से क्या मैं बेवफ़ा हो जाऊंगा

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