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पाश की कविताएं क्रांतिकारी काव्य परंपरा की सार्थक अभिव्यक्तियां हैं... 

काव्य चर्चा

पाश की कविताएं क्रांतिकारी काव्य परंपरा की सार्थक अभिव्यक्तियां हैं... 

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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अपनी कविता के माध्यम से 'पाश' हमारे समाज के जिस वस्तुगत यथार्थ को उद्घाटित और विश्लेषित करना चाहते थे, उसके लिए वे अपनी भाषा, मुहावरे और बिंबों-प्रतीकों का चुनाव ठेठ ग्रामीण जीवन से करते थे। घर-आंगन, खेत-खलिहान, स्कूल-काॅलेज, कोर्ट-कचहरी, पुलिस-फौज और वे तमाम लोग जो इन सब में अपनी-अपनी तरह एक बेहतर मानवीय समाज की आकांक्षा रखते हैं, बार-बार इन कविताओं में आते हैं। 

अंधेरी, काली अंधेरी रातों में 
जब एक पल दूसरे पल से सहमता है, सिहरता है 
चौबारों की रोशनी तब 
खड़कियों से कूदकर आत्महत्या कर लेती है 
इन शांत रातों के गर्भ में 
जब बगावत खौलती है 
रोशनी, बेरोशनी भी क़त्ल हो सकता हूं मैं आगे पढ़ें

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