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भवानी प्रसाद मिश्र

काव्य चर्चा

निराशा में भी उम्मीद के कवि भवानी प्रसाद मिश्र मशहूर कविता....

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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अज्ञेय द्वारा संपादित दूसरे ‘तार-सप्तक’ के सात कवियों में से एक भवानी प्रसाद मिश्र भी हैं, जिनकी कविताएं गांधीवाद के विचार को साथ लेकर चलती हैं। उन्हें उनकी कृति 'बुनी हुई रस्सी' के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था। भवानी बाबू की कविताओं में नये भारत का स्वप्न झलकता है। 

उनकी कविताएं परिवर्तन और सुधार की अभिव्यक्ति हैं। उन्होंने ख़ुद को कभी निराशा के गर्त में डूबने नहीं दिया। आज़ादी के आंदोलन में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया तो बाद में तानाशाही के ख़िलाफ़ भी आवाज़ बुलंद की।  

देश में गुलामी, तानाशाही और आपातकाल सब कुछ देखने-झेलने वाले भवानी बाबू ‘निराशा में भी उम्मीद’ के कवि थे।  पेश है भवानी प्रसाद मिश्र की सुप्रसिद्ध कविता- जिसका शीर्षक है ‘कवि’- 

कलम अपनी साध
और मन की बात बिल्कुल ठीक कह एकाध

यह कि तेरी भर न हो तो कह
और बहते बने सादे ढंग से तो बह

जिस तरह हम बोलते हैं उस तरह तू लिख
और इसके बाद भी हमसे बड़ा तू दिख
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