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chaahat shayari collection

काव्य चर्चा

'चाहतों' पर कहे शायरों के अल्फ़ाज़

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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मसअला ख़त्म हुआ चाहता है
दिल बस अब ज़ख़्म नया चाहता है
- शकील जमाली


मयस्सर से ज़ियादा चाहता है
समुंदर जैसे दरिया चाहता है
- अकरम नक़्क़ाश

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