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Ghulam ali ghazal shayari

काव्य चर्चा

ग़ुलाम अली की गायी ग़ज़लों से चुनिंदा शेर व उनके शायर

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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दिल के लुटने का सबब पूछो न सब के सामने
नाम आएगा तुम्हारा ये कहानी फिर सही
- मसरूर अनवर


चुपके चुपके रात दिन आंसू बहाना याद है
हम को अब तक आशिक़ी का वो ज़माना याद है
- हसरत मोहानी

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