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हस्तीमल हस्ती

काव्य चर्चा

हस्तीमल 'हस्ती': सच के हक़ में खड़ा हुआ जाए 

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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हस्तीमल हस्ती प्रेम गीतों के उम्दा गीतकार हैं। उनकी गजलें धीरे से कानों में इश्क के बारे में कुछ घोल देती हैं। जिसका असर लंबे समय तक रहता है। 'प्यार का पहला खत लिखने में वक्त तो लगता है' गजल को आवाज जगजीत सिंह ने दी है। लेकिन इस गजल को हस्तीमल हस्ती ने लिखा है। हस्ती का जन्म 11 मार्च 1946 को हुआ। 

सच के हक़ में खड़ा हुआ जाए।
जुर्म भी है तो ये किया जाए ।

हर मुसाफ़िर में ये शऊर कहाँ,
कब रुका जाए कब चला जाए।

हर क़दम पर है गुमराही,
किस तरफ़ मेरा काफ़िला जाए।

बात करने से बात बनती है,
कुछ कहा जाए कुछ सुना जाए।

राह मिल जाए हर मुसाफ़िर को,
मेरी गुमराही काम आ जाए।

इसकी तह में हैं कितनी आवाजें
ख़ामोशी को कभी सुना जाए।
 
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