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सतर्क करते और हौसला देते शेर...

काव्य चर्चा

सतर्क करते और हौसला देते शेर...

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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मस्जिद हो मदरसा हो कि मज्लिस कि मय-कदा
महफ़ूज़ शर से कुछ है तो घर है चले-चलो
- वहीद अख़्तर

ज़िंदगी को हौसला देने के ख़ातिर
ख़्वाहिशों को रेज़ा रेज़ा चुन रहा हूँ
- महफूजुर्रहमान आदिल आगे पढ़ें

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