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Hindi Poet Bhawani prasad mishra hindi kavita

काव्य चर्चा

आपातकाल में सुबह-दोपहर-शाम कविता लिखने वाले कवि भवानी प्रसाद मिश्र

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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सीधी भाषा में अपनी बात कहने वाले विलक्षण कवि भवानी प्रसाद मिश्र जिनकी हर कविता जीवन के सार से जुड़ी लगती है। प्रकृति के प्रति अनुराग और सामाजिक चेतनाओं के प्रति सजगता दोनों ही बातें भवानी के काव्य में मिलती हैं। आपातकाल के दौरान उन्होंने ठान लिया था कि दिन के तीन पहर कविताएं लिखेंगे। उन्होंने सुबह, दोपहर और शाम कविताएं लिखीं। जिसे त्रिकाल संध्या नामक पुस्तक में प्रकाशित किया गया। उन्हींं दिनों की एक कविता है

बहुत नहीं सिर्फ़ चार कौए थे काले,
उन्होंने यह तय किया कि सारे उड़ने वाले
उनके ढंग से उड़ें, रुकें, खायें और गायें
वे जिसको त्यौहार कहें सब उसे मनाएं

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