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कवि कुंवर नारायण

काव्य चर्चा

इतिहास और मिथक के माध्यम से वर्तमान को देखते कुंवर नारायण

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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कुंवर नारायण वर्तमान युग के सर्वश्रेष्ठ साहित्यकारों में से एक थे। उन्हें अपनी रचनाशीलता में इतिहास और मिथक के जरिए वर्तमान को देखने के लिए जाना जाता है।
अपनी कविताओं के माध्यम से हिन्दी साहित्य की सेवा करने के साथ उन्होंनें कहानी, समीक्षा, सिनेमा व रंगमंच आदि विधाओं में भी उत्कृष्ट लेखनी चलाई है। उनके लेखन में
 संप्रेष्णीयता के साथ-साथ प्रयोगधर्मिता का मिश्रण देखने को मिलता है। 1956 में उनका पहला काव्य संग्रह चक्रव्यूह प्रकाशित हुआ थोड़े समय में ही उन्होंनें अपनी
प्रयागधर्मिता के आधार पर काव्य जगत में पहचान बना ली। कुंवर नारायण जी की  प्रतिभा से प्रभावित होकर अज्ञेय जी नें उनकी कविातओं को उस समय के प्रख्यात
कवियों केदारनाथ सिंह, सर्वेश्वर दयाल सक्सैना की कविताओं के साथ तीसरा तारसप्तक में शामिल किया।   आगे पढ़ें

उन्होंनें मृत्यु की शाश्वत समस्या को

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