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तुलसी बाबा लिखते हैं कि राम राज्य में कोई छोटी उम्र में नहीं मरता था...

काव्य चर्चा

राम राज्य: नहिं दरिद्र कोउ दुखी न दीना, नहिं कोउ अबुध न लच्छन हीना

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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दैहिक दैविक भौतिक तापा। राम राज नहिं काहुहि ब्यापा
सब नर करहिं परस्पर प्रीती। चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीती


भावार्थ:- 'रामराज्य' में  किसी को दैहिक, दैविक और भौतिक तकलीफ नहीं थी। सब मनुष्य परस्पर प्रेम करते थे और वेदों में बताई हुई नीति (मर्यादा) में तत्पर रहकर अपने-अपने धर्म का पालन करते हैं। आगे पढ़ें

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