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रामचरितमानस: कलियुग में कौन ज्ञानी, कौन वक्ता और कौन नेता...

काव्य चर्चा

रामचरितमानस: तुलसी बाबा से जानिए कलियुग में कौन ज्ञानी, कौन वक्ता...

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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दो० - कलिमल ग्रसे धर्म सब लुप्त भए सदग्रंथ।
दंभिन्ह निज मति कल्पि करि प्रगट किए बहु पंथ॥ 

भावार्थ:- कलियुग के पापों ने सब धर्मों को ग्रस लिया, सद्ग्रंथ लुप्त हो गए, दंभियों ने अपनी बुद्धि से कल्पना कर-करके बहुत-से पंथ प्रकट कर दिए॥ 

मारग सोइ जा कहुँ जोइ भावा। पंडित सोइ जो गाल बजावा॥
मिथ्यारंभ दंभ रत जोई। ता कहुँ संत कहइ सब कोई॥

भावार्थ:-जिसको जो अच्छा लग जाए, वही मार्ग है। जो डींग मारता है, वही पंडित है। जो मिथ्या आरंभ करता (आडंबर रचता) है और जो दंभ में रत है, उसी को सब कोई संत कहते हैं। आगे पढ़ें

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