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'ठहराव' पर कहे गए शेर...

काव्य चर्चा

'ठहराव' पर कहे गए शेर...

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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जो किसी दर पे न ठहरे वो हवा लगती हो
ज़ुल्फ़ लहराए तो आँचल में छुपा लेती हो
- साहिर लुधियानवी

मैं भी रुकता हूँ मगर रेग-ए-रवाँ की सूरत
मेरा ठहराव रवानी की तरह होता है
- फ़ैसल अजमी आगे पढ़ें

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