आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Kavya Charcha ›   Vishal Bagh popular shayari jab wo bole ki koi pyaara tha
विशाल बाग़

काव्य चर्चा

जब वो बोले कि कोई प्यारा था उनका मेरी तरफ़ इशारा था - विशाल बाग़

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

1269 Views
लफ़्जों को बहुत दिनों तक ख़ुद के भीतर रख पाना बेहद मुश्किल होता है, अपने भीतर मुक्कमल बात लिए हुए ये लफ़्ज वक़्त के साथ सही मुकाम तक पहुंच ही जाते है। अपनी शायरी से इसी तरह लफ़्जों को और उनके भीतर के मखमली अहसास को पढ़ने-सुनने वालों तक पहुंचाने का जरूरी काम कर रहे हैं विशाल बाग़।
विशाल बेहद करीने से अपनी बातों को शायरी का जामा पहनाते हैं और इस तरह जो बात अक्सर दिखती नहीं उसे आप उनकी शायरी से देखने लगते हैं। 
विशाल अपनी शायरी से कहते है कि नींद का आना नींद नहीं, उनके ख़्वाब में आने की तैयारी है। इस तरह के कई शेर हैं जो आपको सुख़नवर विशाल की नशिस्त में मिलेंगे। आज पेश है उनकी दो ग़ज़ल --- आगे पढ़ें

जब वो बोले कि कोई प्यारा था उनका मेरी तरफ़ इशारा था

सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!