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Amrita pritam life

मैं इनका मुरीद

अमृता के कलाम अपने समय के चश्मदीद हैं और वे अब सदियों तक गवाही देंगे

दीपाली अग्रवाल काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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अमृता प्रीतम के नाम से कोई नावाकिफ़ हो ये नामुमकिन है। कम-अज़-कम अदब के कद्रदान तो नहीं। उनके कलामों ने उन्हें साहित्य के आसमान का एक चमकीला सितारा तय किया है। ऐसा सितारा जिसकी रौशनी से कितनी ही पीढ़ियां रौशन होंगी। उनके कलाम अपने समय के चश्मदीद हैं और वे अब सदियों तक गवाही देंगे। 

इसलिए ये फ़क़त एक कोरी रस्म है किसी ख़ास दिन ही अमृता को याद किया जाए। लेखकों के लिए एक दिन मुकर्रर नहीं किया जा सकता, उनका लिखा गया वक़्त और तारीक़ों के परे उनकी याद दिलाता रहता है। बहरहाल दौर रिवाज़ों का है तो हम भी ये रस्म निभाए जाते है कि आज अमृता का जन्मदिन है और आज अगर वह होतीं तो 100 बसंत पूरे कर लेतीं। आज पंजाब की उस लेखिका का जन्मदिन है जिसे ज़ुबान तक़सीम ना कर सकी। भलें उसके लिखे में इसी बंटवारे का ग़म बेहद था।

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अमृता ने लिखा कि

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