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फ़िराक़ गोरखपुरी

मैं इनका मुरीद

मतवाले नहीं, खुदा का इश्क़-ए-नूर थे फकीराना फ़िराक़

शरद मिश्र, अमर उजाला काव्य डेस्क-नई दिल्ली

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बेखौफ शायराना अंदाज के साथ साथ साहित्य जगत में फ़िराक़ गोरखपुरी अपनी जिंदादिली के लिए भी मशहूर थे। गोरखपुरी अपनी शायरी में और शायरों की तरह इश्क़ को ही एक बड़ा मुकाम देते हैं। 

छिड़ गये 
साज़े-इश्क़ के गाने 
खुल गये ज़िन्दगी के मयख़ाने 

आज तो कुफ्रे-इश्क़े चौंक उठा आज तो बोल उठे हैं दीवाने 
कुछ गराँ1 हो चला है बारे-नशात आज दुखते हैं हुस्ने के शाने2
बाद मुद्दत के तेरे हिज्र में फिर आज बैठा हूँ दिल को समझाने 
हासिले-हुस्नो-इश्क़ बस है यही आदमी आदमी को पहचाने 
तू भी 
आमादा-ए-सफ़र हो फ़िराक 
काफ़िले उस तरफ़ लगे जाने 

1- भारी, 2- कन्धे आगे पढ़ें

तेरी आँखों ने मुझसे बात कर ली... 

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