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मख़दूम ने फरमाया कि प्रेम और युद्ध की कविता अलग-अलग नहीं होती...

मैं इनका मुरीद

मख़दूम ने फरमाया कि प्रेम और युद्ध की कविता अलग-अलग नहीं होती...

राजेश कुमार यादव, वर्धा 

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4 फरवरी 1908 को हैदराबाद रियासत के अन्डोल गाँव में (अब जिला मेडक में) जन्मे मख़दूम मोहिउद्दीन ने हैदराबाद राज्य के निज़ाम के ख़िलाफ़ 1946-1947 के तेलंगाना विद्रोह में अपनी ग़ज़ल और शायरी से क्रांति जगाने का काम किया था। इस संघर्ष में मख़दूम ने ग़रीब किसानों को निज़ामशाही के शोषण से मुक्ति दिलाने के लिए ख़ुद बंदूक उठाई थी और निज़ाम की सेना का भी मुक़ाबला किया था। वे अपनी कलम के साथ-साथ बंदूक भी उठाए घूमते थे।

निज़ाम की हुक़ूमत ने उनके सिर पर उस जमाने में पांच हजार का इनाम घोषित कर रखा था। निज़ामशाही पर इस शायर का ख़ौफ़ इतना अधिक था कि हैदराबाद के तत्कालीन शासक, मीर उस्मान अली ख़ान (निज़ाम) ने बग़ावत के लिए लोगों को भड़काने का आरोप लगाकर मख़दूम को जान से मारने का आदेश दिया था।  आगे पढ़ें

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