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मेरे अल्फाज़

खून थूका है मेरी आंखों ने

Ajay Upadhyay

17 कविताएं

424 Views
सभी रिश्तों के रिवाजों को निभाने मे
खून थूका है मेरी आँखों ने
असर तीर का मुझपे कभी हुआ ही नहीं
कलेजा चीर दिया है तुम्हारी बातों ने
गिनना चाहोगे तो गिन नहीं पावोगे तुम
इतने लाश उठाएं हैं मेरे हाथों ने

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