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मेरे अल्फाज़

इश्क़ से पहचान चाहते हैं

Akash Yadav

5 कविताएं

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अब आ भी जा तुमसे एहसान चाहते हैं!
हम भी तुम्हारे इश्क़ से पहचान चाहते हैं!!

महकते इस गुलशन में तेरा रैन बसेरा हो!
तुम्हें दिल के बागान में किसान चाहते हैं!!

धड़कते इस बगिया में बस तेरी सरकार है!
तेरे आते जाते पैरों का निशान चाहते हैं !!

जिसमें तेरे मेरे बीच एक नई कहानी हो!
दिल में स्वर्ग से भी सुंदर मकान चाहते हैं!!

दिल में तेरे नाम एक मंदिर भी बनाना है!
तू दे दे तेरे प्यार का अनुदान चाहते हैं !!


(आकाश यादव)


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