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मेरे अल्फाज़

आप भी मंज़िल पा सकते हैं

Alija Kumari

58 कविताएं

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ज्ञान के इस मंदिर में,
सारे एक समान हैं,
सब में कुछ विशेष है,
सबके अंदर ज्ञान की ज्योति है,
बस आवश्यकता है इसे जलाने की,
जग में प्रकाश फैलाने की।

छोड़ कर पर की बुराई,
खुद की बुराई मिटाओ अब,
ताका-झांकी छोड़ कर,
अपने अंदर झांको अब,
कब तक चलोगे पर के पैरों पर,
खुद को सशक्त बनाओ अब।
आप भी कुछ कर सकते हो,
जग में नाम अमर कर सकते हो।
पहचान करो उस शक्ति की,
अंतर्मन से बात करो,
छोड़कर झूठा दिखावा,
अपने आप से विचार करो।
पहचान कर अपनी शक्ति,
उसके पीछे भागो आप,
आप भी मंजिल पा सकते हो,
जग में नाम कमा सकते हो।

एलिजा

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