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मेरे अल्फाज़

बंधन कभी भी लग जाता है

Alija Kumari

59 कविताएं

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इन बंधन का क्या,
कभी भी लग जाता है।
पैरों का पायल जंजीर बन जाती है,
हाथों का कंगन बेरी बन जाता है।
इन बंधन का क्या,
कभी भी लग जाता है।
जब घर से निकलती है,
जुल्फें हिलाती है ,
चुनरी लहराती है,
तभी कोई बात सामने आ जाता है।
इन बंधन का क्या,
कभी भी लग जाता है।
जब चलती है हवा में,
खुले गगन में सैर लगाती है,
बारिश की बूंदों में,
जब वो भींग जाती है,
तभी कोई दीवार सामने आ जाता है।
इन बंधन का क्या,
कभी भी लग जाता है।
जब जाती है मैदान,
उड़ान नया भरती है,
कुछ नया करने का,
जज्बा दिखाती है,
तभी कोई आँधी सामने आ जाती है।
इन बंधन का क्या,
कभी भी लग जाता है।

:-एलिजा


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