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मेरे अल्फाज़

चंद्रयान

Alija Kumari

59 कविताएं

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मानते हैं असफल हुआ चंद्रयान,
अपने मंजिल को पाने में,
पर हारे नहीं है,
अब भी जोश है हमारे अंदर।
सोचते हैं विक्रम,
अधिक आकर्षित हो गया,
दौड़कर चांद के,
गोद में सो गया।
क्या हुआ ?अगर ना बताएगा विक्रम,
दक्षिणी ध्रुव का रहस्य इस धरा को,
और ना छू पायेगा भारत का चिन्ह,
चांद के सुंदर सतह को।
हम फिर से प्रयास करेंगे,
एक नया उड़ान भरेंगे,
चांद की सुंदर सतह को,
फिर छू कर नमन करेंगे।

:-"एलिजा"


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