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मेरे अल्फाज़

दोस्त तुम मत खोना होश

Alija Kumari

59 कविताएं

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ओ मेरे प्यारे दोस्त,
इस जगत में ना खोना होश।
अलग-अलग है लोग यहां पर,
अलग-अलग है गुण और दोष।
कोई तुम्हें बहकाएँगे,
कोई सही राह दिखाएंगे।
कदम-कदम पर मोड़ मिलेंगे ,
राह समझ ना आएंगे।
कदम बढ़ाना सोच समझकर,
मंजिल अवश्य मिल जाएंगे।
ओ मेरे प्यारे दोस्त,
इस जगत में ना खोना होश।
अलग अलग है कर्म यहां पर,
अलग अलग है उनका मान।
कोई तुम्हें प्रेम-भाव से,
बुरे कर्म करवाएंगे,
हाथ पकड़कर तुम्हें प्यार से,
गलत राहो पर चलवाएँगे।
इस जगत में आंखें खोल कर रखना,
बुरे कर्म से बचकर चलना,
सदा तुम अच्छी राह पर चलना।
कर्म है इस जग में प्रधान,
कर्म से होता है मान-सम्मान।
बुरे कर्म तो नाम बुरे भी,
कर्म भले तो जग में मान।
ओ मेरे प्यारे दोस्त,
इस जगत में ना खोना होश।



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