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मेरे अल्फाज़

नारी शक्ति

Alija Kumari

59 कविताएं

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नारी को ना समझो निर्बल,
नारी शक्ति है अपार।
प्रेम है उसमें, दया है उसमें,
है करुणा का सागर उसमें,
दुख को देख दुखी होती,
सुख में धूम मचाती है।
सबका वह सेवा करती,
कभी नहीं वह थकती है।
समाज में कुरुति ऐसा,
क्यों उसे समझ न पाते हैं।
वह मां है सबकी,
बहन है सबकी,
फिर भी न अपनाते है।
उनके आने की खबर सुनकर,
भ्रूण हत्या करवाते है।
मरते हैं सब रुपयों पर,
नारी को महत्व न देते है।
दहेज का नाम ले -लेकर ,
उन्हें सताते रहते हैं।
वह सहमी-सहमी रहती है,
पर ना कुछ वो कहती है।
समझती है वो रिश्ते-नाते, है
प्रेम सभी से करती है।
सुनती है ताने, सुनती गाली,
फिर भी माफ वो करती है।
हर पल दिखाती शक्ति अपनी,
पर कोई नहीं समझ पाता है।
प्रेम दया की मूर्ति है नारी,
उसमें है शक्ति आपार।

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