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मेरे अल्फाज़

समय का पता ना लगता है

Alija Kumari

59 कविताएं

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समय का पता न लगता है,
कब कैसे चलता जाता है।
सूरज उगता ढल भी जाता,
पता नहीं लग पाता है।

एक-एक पल को,
समझ ना पाते,
वो तो चलते जाता है।
रात गुजरी दिन भी हुआ,
समझ नहीं कुछ आता है।

कभी बैठे थे, मां के गोद में,
बचपन का वो झूला था,
उम्र बढ़ गयी, बढ़ी लंबाई,
पता नहीं चल पाया है।

घूमती थी कभी गली में,
पापा की उंगली थामे।
आज तो है सपना बना,
समय क्या मोड़ लाया है।

स्कूल का दिन बीत गया,
आया कॉलेज का दिन भारी,
खेल-कूद पीछे छूटा,
छुटी मस्ती की झुंड हमारी
,
आया सर किताब का बोझ,
अब करना है कुछ नया खोज।
समय ने कैसा लाया मोर,
कभी नही होता है भोर।

समय का पता न लगता है,
कब कैसे चलते जाता है।

- एलिजा

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