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मेरे अल्फाज़

सर्द का सूरज

Alija Kumari

58 कविताएं

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सर्द का सूरज,
है खामोश चला।
दिव्य ताप छुपा के अपना,
है मुस्कुराता आसमा में चला।
सम्राट था वो गर्मी का,
ठंढ में प्रजा बन गया।
चाँद का शितलता अब,
उनपर भी बरस गया।
चौतरफा चलता पवन,
और ठंढ़ का साथ दिया।
सूरज के किरणों को,
वह इधर-उधर भटका दिया।
चारो तरफ फैले कोहरे को,
किरणों ने ना छेद सका।
सूरज अपने आत्मबल को,
खामोशी से है आँक रहा।

:-एलिजा


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