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मेरे अल्फाज़

शाम का पावन मौसम

Alija Kumari

59 कविताएं

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ईश्वर का है वरदान,
पावन होता है हर शाम।
मंद-मंद शीतल हवा,
गुजर रही मीठी स्वर में गान।
दूर आम की डाली पर,
कोयल बैठ रही है गान।
स्वतंत्र नभ में,
साफ गगन में,
पंछी विचरण कर रही पंख फैला।
सूरज की ढलती लाली,
आसमान को रही सजा।
गैया लौट चले हैं घर को,
लौट चले हैं अब किसान।
पावन हवा में घूम रहे हैं,
बच्चे, बूढ़े और जवान।
लग गई वटवृक्ष पर झुला,
सब में स्फूर्ति अब भरा।
देखो अंबर में एक तारा,
अब निकल कर बाहर आया।
शाम का ये पावन मौसम,
सबके मन को है भाया।

:-एलिजा

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