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मेरे अल्फाज़

इश्क़

Anurag Chaubey

5 कविताएं

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इन्तज़ार ए इश्क़ हुआ क्या..
इश्क़ भी क़ुबूल हुआ क्या..
तपती धूप की मगरूर हवा..
जल सौदामनी की प्रेम दवा..
लक्ष्य भी अटक लिया क्या..
अभीष्ट से सटक लिया क्या..
कांच की खुली खिड़कियां..
फिर उड़ जाती हैं तितलियां..
जी सुबह ए इश्क़ हुआ क्या..
या हाल ए इश्क़ हुआ क्या..
अरमानों का दम घूंटती है...
ठीक जहर विषैली होती है..
धरा के धूल से हुआ क्या..
वृक्षों के छांव से हुआ क्या..
इन्तजार ए इश्क़ हुआ क्या..
इश्क़ भी क़ुबूल हुआ क्या..

अनुराग चौबे

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