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मेरे अल्फाज़

राममय अब है संसार

Ashish Aweley

1 कविता

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सुन्दर चरित्र की कल्पना
होते ही, मन में, राम तुम,
त्याग, निष्ठा, धर्म, ज्ञान
की परिभाषा, बस, राम तुम |

वायु धरा के अंश-अंश में
हो समोप्त, मेरे आराध्य,
धन्य जीवन हो गया
राममय अब है संसार |

हर मन में राम, चेतना में राम
तुम में सम्मलित, चारों ही धाम,
तुम ही प्राण, तुम ही आधार
सृष्टि के तुम पालनहार |

हे रघुवीर, मेरे घनश्याम
तुम अनंत, सदैव विद्यमान,
कृपा करें प्रभु आशीष दे
श्री अयोध्याजी पुनः विराजिए |


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