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मेरे अल्फाज़

आरज़ू

ashwani singh

27 कविताएं

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सफ़र की अपनी खुशकिस्मती,
ठोकर के साथ-साथ सीख हैं दे जाता।

ख्याल की दरिया पार कर जाता,
रोता तो तैर कर के गुज़र जाता।

उम्मीद पर दुनिया आज भी कायम,
कोशिश किए वगैरह कैसे हार जाता।

तैयारी सजै समान ही नही जज़्बात है,
मौका आज नहीं तो कल मिल जाता।

कहते क्या सुखन शौक़ हैं पुराना,
कहीं ये दबा आरज़ू दिल में ही रह जाता।

- अशवनी

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