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मेरे अल्फाज़

शिव अराधना

Babulal Kushwaha

3 कविताएं

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जिनकी गाथा से गुंजता
तीनों लोकों में कोहराम
कट जाती विपदा भी आए
जो लेते शिव का नाम

गले में विषधर धारण करके
चोटी में गंगा जल भर के
सिर पर रखते चांद
जो तीन नेत्र को धारण करके
डमरू त्रिशूल लिए हैं हाथ

नाम से जिनकी मिलती मुक्ति
पावन उनका है धाम
सुरसुदन चंद्रशेखर त्रिलोचन
कई है इनके नाम

जो भूतों के मालिक है
दुष्टों का करते संघार
है क्रोध उनका बड़ा बलवान
जो पल में मिटा सकता संसार

मरने से पहले ले ले
जो शिव शक्ति का नाम
यह लघु संसार खुद कहता है
हो जाती नईया पार
इससे अभागा कौन है
जो ले सके ना शिव का नाम

बाबूलाल कुशवाहा
राजापुर गाजीपुर उत्तर प्रदेश

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