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मेरे अल्फाज़

फ़ुर्सत में तेरा नाम मैं गुनगुनाता हूं

basu harbansh

16 कविताएं

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फ़ुर्सत में तेरा नाम मैं गुनगुनाता हूं,
तुझको हिचकियां दे देकर मैं सताता हूं,

दोष ये मेरा है कि मैं तेरा दीवाना हूं,
माफ़ करना ये इल्ज़ाम मैं तुझपे लगाता हूं,

तुझको न दिखूं पर मैं तेरा साया हूं,
रोज तुझसे मिलने बनके हवा मैं आता हूं,

तू देखे जहाँ हर जगह मैं ही तो हूं,
तू ढूंढ़ती है मुझे और मैं छुप जाता हूं,

तुझसे इस तरह मैं प्यार निभाता हूं,
तेरी तकलीफ़ पे मैं ख़ुद को रुलाता हूं,

पूरा का पूरा मैं तुम्हरा हूं,
यूँ ही नहीं अपना दिल मैं तुझपे लुटाता हूं।

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