आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Hey Veer - Itihas bana de

मेरे अल्फाज़

हे वीर - इतिहास बना दे

Bhushan Singh

1 कविता

14 Views
जीवन के मैदान में, हर कदम पे जंग हैं |
लड़ना पड़ेगा तुझको ही, कोई नहीं तेरे संग हैं ||
ऐसा नेतृत्व कर, खुद का अस्तित्वा कर |
हर जंग के मैदान में, दुश्मन को तू चित कर ||

खुद को ही जीत का लिबास बना दे |
हे वीर - इतिहास बना दे.. ||

निर्णय पे अपने अटें रह, लक्ष्य को तू रटे रह |
विश्वास का पहाड़ बना हर मुश्किल पे डंटे रह ||
कर के अपनी जीत सबके होश उड़ा दे |
हे वीर - इतिहास बना दे.. ||

अगर किया तैयारी है, सब पर तू भारी है |
फ़तेह का झंडा गार ही देगा, बेशक दुनिया सारी हो ||
कर प्रयत्न खुद को तू ख़ास बना दे |
हे वीर - इतिहास बना दे.. ||

आम नहीं तुम ख़ास हो, खुद के खुद ही बॉस हो |
सफलता की तैयारी में आत्म विश्वास से लैस हो ||
भूषण जैसे सपनो को तू प्यास बना दे ||
हे वीर - इतिहास बना दे.. ||

लेखक - भूषण सिंह


हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
 
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!