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मेरे अल्फाज़

सवाल

Deepmala Maheshwari

12 कविताएं

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ख़ुद से मुख़ातिब हो
एक सवाल पूछ रहा हूं
आज अपने ही दिल से
अपना ही हाल पूछ रहा हूं,

कुछ सरसराहट सी है ज़िस्म में
छुआ है किसने इसे
उस दिल का वो अहसास पूछ रहा हूं,

कोई नहीं है पास फिर भी
कुछ तो सुनाई देता है
है किसकी ये आवाज़
इसका वो हमनावज पूछ रहा हूं,

बज रहे है तार दिल के
थिरक रही है हर धड़कन
छेड़ रहा है जो इसको
इस सुर का वो साज पूछ रहा हूं,

सोचता हूं तो हंसी आती है
क्यों ये बार-बार दोहरा रहा हूं
प्यार करके खुद मैं खुद ही से
सवाल पूछे जा रहा हूं
आज अपने ही दिल से
अपना ही हाल पूछ रहा हूं
अपना ही हाल पूछ रहा हूं।

दीपमाला माहेश्वरी

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