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मेरे अल्फाज़

इंतज़ारों के सहारे अब रहा ना जाएगा

dinesh chand

26 कविताएं

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इन्तज़ारों के सहारे, अब रहा न जाएगा
रिमझिमी बरसात में ये सब्र न रह पाएगा

बाहों में मचले जवानी, हसरतें बौरान हैं
उफ! ये तन्हाई का आलम जान लेकर जाएगा

उम्र-भर चलते रहेंगे, रोज़मर्रा-सिलसिले
रूठकर निकला वो सावन, लौटकर न आएगा

दिल के जख़्मों पर हवाओ उंगलियां न फेरिये
जिस्म जर्जर हो चुका है, टूटकर गिर जाएगा

साथिया! परदेश में, वो वाक़िये न छेड़िये
लाख़ वालों का मुक़द्दर, ख़ाक में मिल जाएगा

प्यार के लम्हों की कीमत आंक कर तो देखिये
ऐ! समझदारो तुम्हारा, इतमीनां हिल जाएगा


-- दिनेशचंद शर्मा (चाँद भरतपुरी)


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