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मेरे अल्फाज़

काली पीली सी घटाएँ आसमां चढ़ चढ़ आई

dinesh kumar

267 कविताएं

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कड़ कड़ करती बिजली चमकी
मेरे दिल को धमकाई
काली पीली सी घटाएँ
आसमां चढ़ चढ़ आई

दिन में भी हो गया अंधेरा
यारों मेरी जान पर बन आई
काली पीली सी घटाएँ देखकर
मेरी साँसें भी घबराई

धूल भरी आँधियाँ भी
मेरे घर पर मंडराई
आड़े तीखे हवा के झोंको ने
मेरे घर की छत भी गिराई

मैं भी था वंशज मनु का
तूफान से हार नहीं मानी
कर हौसलों को बुलंद
तूफान से लड़ने की ठानी

आव देखा ना ताव देखा
मैंने तूफान की नियति जानी
फिर सारा तोल भाव करके
अपनी शक्ति पहचानी

वर्षों पहले जो नानी किया करती थी
वो मैंने भी करने की ठानी
वर्षों बाद ही सही मुझको
तूफान के बहाने याद आई नानी

देख के मेरे बुलंद हौसले
काली पीली घटाएँ भी शरमाई
अफ़सोस हुआ आज आँधी को भी
क्यों मनु के हौसलों के पहाड़ से टकराई

दम तोड़ दिया उसने भी
फिर जोर जोर से घबराई
सारी घटना मैंने अनुभव से
तुम सब को आज बताई


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