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मेरे अल्फाज़

खामोशी का ख़त

Harikesh Yadav

74 कविताएं

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तू भी ख़ुदा की करतबों का अज़ब पसीना है
तुझे भी जीना है और मुझे भी जीना है
तेरी ख़ामोशियों को ख़त समझकर पढ़ लिया मैंने
फकत समझ में कुछ नहीं आया
कहीं जा कर कोने में रो लिया मैंने
Harikesh Yadav
Banaras Hindu University Varanasi Uttar Pradesh


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