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मेरे अल्फाज़

मेरे प्यार के उपमान सारे मैले हो गए

Harikesh Yadav

74 कविताएं

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मेरे प्यार के उपमान सारे मैले हो गए
हर अक्षर की अभिलाषाओं के अभिमान
सारे खोखले हो गए

लेकिन तुम अपने हृदय में प्यार के ही गीत सजाना
मेरे लिए न सही अपने प्रियतम के लिए चले आना

प्यार के पनघट पर वो तुम्हारी राह तकेगा
इसीलिए अपने होठों पर उसका नाम रटे आना

राधिका का रूप धरे अपना श्रृंगार करे आना
अपने अधरों से उसके अधरों की प्यास बुझाते जाना

जाते जाते उसको अपना घनश्याम बनाते जाना
राधा उसकी बन बन कर आते जाते रहना

सदा छांव बनना उसके जीवन की, धूप कभी मत लगने देना
स्वयं भी कभी न भटकना और न उसे कभी भटकने देना

अपनी सागर सी बाहों में लेकर उसको
प्यार के गीत गाते जाना
स्वयं धरा बन जाना,
उसको अपना आकाश बनाते जाना

हरिकेश यादव
काशी हिंदू विश्वविद्यालय


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