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मेरे अल्फाज़

साज़िश

Harikesh Yadav

74 कविताएं

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फिर भी तू मुग्ध हुआ होगा ख़ुद के सवालों पर
ख़ुद की ख़्वाहिशों और ख़ुद के ख़्वाबों पर
और भूली होगी तुमने ख़ुद की मासूम खताएं
तोड़ी होंगी न जाने तूने कितनी औरों की आशाएं
तड़पे होंगे शब्द उन्हीं के
जिसने चाही होंगी तुझको देनी परिभाषाएं
तुझे सोचना अब सबको ख़ुद से करना गद्दारी लगता है
खाने ज़ख़्म तेरे अब सबको मक्कारी लगता है
फिर भी तड़प तड़प कर लिखे होंगे वो तेरी अनुशंसाएं
दिल के ज़र्रे ज़र्रे में तू सबकी प्यास बनी होगी
पल पल का तू उनका इश्क़ का इतिहास बनी होगी
तुममें न जाने कितनों ने विश्वास जगाया होगा
तेरी खुशियों की खातिर , ख्वाहिशों में ही सही
न जाने कितनी बार आफताब या आकाश झुकाया होगा

Harikesh Yadav
BHU Varanasi 

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