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मेरे अल्फाज़

तुझे पाना तो हर किसी का ख़्वाब हो सकता है

Harikesh Yadav

74 कविताएं

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भूल थी मेरी जो तुझको फूल समझ बैठा
तू तो कांटों से भी ज्यादा चुभने वाला निकला

साहेब! जज़्बात का कोई आकार नहीं होता
झूठा ही सही पर मोहब्बत का कोई पल बेकार नहीं होता

माना कि तुम मोहब्बत की खुली किताब हो
तो क्या हुआ गर मैं तुम्हें पढ़ नहीं पाया

मुझे बदनाम करते करते तू ख़ुद भी बदनाम हुआ होगा
गर तेरा नाम हुआ होगा तो मेरा भी नाम हुआ होगा

जिनसे हम हर बात छुपाते रहे
उन्हीं को तुम वो हर बात समझा समझा कर बताते रहे

तुझे पाना तो हर किसी का ख़्वाब हो सकता है
पर तुझे पाने वाला ही इस धरा पर ख़ास हो सकता है

चाहे तुम्हें ख़्वाब कहूं या ख़्वाहिश
पर मेरे ज़ख्मों के मायने नहीं बदलेंगे

तुझे अपना अश्क कहूं या अपना ख़ुदा
पर इस ज़माने के मायने नहीं बदलेंगे

हरिकेश यादव
काशी हिंदू विश्वविद्यालय


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