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मेरे अल्फाज़

वो मेरे जज़्बात समझ न पाई

Harikesh Yadav

74 कविताएं

17 Views
मेरे प्यार की गालियां सूनी पड़ी रही
क्योंकि वो मेरे जज़्बात समझ न पाई
वो मेरी ज़िन्दगी में आई ज़रूर थी
पर मेरे अल्फ़ाज़ समझ न पाई थी
मेरा प्यार करना ही उसे रास नहीं आया
उसने ख़ुद को ही मेरे प्यार पर विश्वास नहीं दिलाया

Harikesh Yadav
BHU Varanasi


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